अप्रैल में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 24.3% रहा, पिछले अप्रैल के मुकाबले घटा
ऊंचे राजस्व और सरकार के कम खर्च की वजह से पिछले साल के इसी महीने की तुलना में राजकोषीय घाटा कम रहा है.

नई दिल्लीः देश की केंद्र सरकार के लिए आर्थिक मोर्चे पर थोड़ी राहत की खबर है. चालू वित्त वर्ष के पहले महीने अप्रैल में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 24.3 फीसदी रहा है. ऊंचे राजस्व और सरकार के कम खर्च की वजह से पिछले साल के इसी महीने की तुलना में राजकोषीय घाटा कम रहा है. पिछले वित्त वर्ष के अप्रैल महीने में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 37.6 फीसदी रहा था. कुल रेवेन्यू और खर्च का अंतर राजकोषीय घाटा कहलाता है.
लेखा महानियंत्रक (सीजीए) ने जो आंकड़े जारी किए हैं उनके मुताबिक अप्रैल, 2018 में सरकार की प्राप्तियां 71,450 करोड़ रुपये रहीं जो 2018-19 के कुल बजट अनुमान का 3.93 फीसदी हैं. इसमें से 57,533 करोड़ रुपये सरकार को टैक्स रेवेन्यू के रूप में मिले. वहीं 13,124 करोड़ रुपये नॉन टैक्स रेवेन्यू और 793 करोड़ रुपये गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां रहीं. गैर ऋण पूंजीगत प्राप्तियों में कर्ज की वसूली (359 करोड़ रुपये) और सार्वजनिक उपक्रम विनिवेश से (434 करोड़ रुपये) की आय शामिल हैं.
सरकार का कुल खर्च
इस अवधि में सरकार का कुल खर्च 2,23,417 करोड़ रुपये रहा. यह कुल बजट अनुमान का 9.15 फीसदी रहा. इसमें से 1.76 लाख करोड़ रुपये राजस्व खाते और 46,703 करोड़ रुपये पूंजी खाते से खर्च हुए.
इस अवधि में सरकार का कुल खर्च 2,23,417 करोड़ रुपये रहा. यह कुल बजट अनुमान का 9.15 फीसदी रहा. इसमें से 1.76 लाख करोड़ रुपये राजस्व खाते और 46,703 करोड़ रुपये पूंजी खाते से खर्च हुए.
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सरकार ने इस अवधि में राज्य सरकारों को टैक्स में उनके हिस्से के रूप में 55,789 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए. यह इससे पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 7611 करोड़ रुपये ज्यादा है.
सरकार ने चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.3 फीसदी पर रखने का लक्ष्य तय किया है. साल 2017-18 में यह 3.53 फीसदी रहा था.
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